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सखी री दीप जला

   



 


कर सोलह शृंगार, सखी री दीप जला।
पावन है त्यौहार, सखी री दीप जला।

तम-विभावरी, झिलमिला रही, पूनम सी।
ज्योतित है संसार, सखी री दीप जला।

भाव भावना, पूर्ण अल्पना, शोभित हो।
बाँधो वंदनवार, सखी री दीप जला।

रिद्धि-सिद्धि के सुख-समृद्धि के, द्वार खुलें।
घर-घर पनपे प्यार, सखी री दीप जला।

पद्मवासिनी, वरद लक्षमी, द्वार खड़ी।
कर स्वागत सत्कार, सखी री दीप जला।

धैर्य-ध्यान से, विधि विधान से, कर-पूजन।
मंगल मंत्र उचार, सखी री दीप जला।

सतत साल भर, हों प्रकाशमय, जन-जन के।
आँगन, देहरी, द्वार, सखी री दीप जला।

कर्म-ज्ञान के, धर्म-दान के, रोशन हों।
हर मन में सुविचार, सखी री दीप जला।

चिर उजियाली, शुभ दीवाली, फिर लाए।
मन-भावन उपहार, सखी री दीप जला।

-कल्पना रामानी
२८ अक्तूबर २०१३

   

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