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           फुलझड़ियाँ लाईं उपहार


फुलझड़ियाँ लाईं उपहार
दीप करें
स्वागत सत्कार

धन्वंतरि आशीष लुटाते
स्वस्थ निरोगी जगत बनाते
तन-मन पावन सुंदर जीवन-
यश वैभव सम्मान बढ़ाते
गूँजें शंख
मंत्र उच्चार

घर-घर लक्ष्मी धन बरसाती
अरमानों की लड़ी लगाती
जन मानस में जागी आशा-
जलते घी के दीपक बाती
छलके कुंड
भरा भंडार

चकरी चक्कर खूब लगाए
खील खिलौना मन हर्षाए
क्रोध जलाकर आतिशबाजी-
बैरी नफरत दूर भगाए
दिल से जुड़ते
दिल के तार

खूब सजी फूलों से थाली
जगमग करतीं रातें काली
प्रीत लुटाती पान घड़ियाँ
घर-आँगन छाई खुशहाली
आया पावन
फिर त्यौहार

- पुष्प लता शर्मा
१ अक्टूबर २०२२

       

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