अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

       

      फुलझड़ियों की किस्मत


फुलझड़ियों की किस्मत में है
जलना और बिखरते जाना

सभी पटाखे फोड़ रहें हैं
दीप देहरी उजियारे हैं
घर आँगन छत मुंडेरों पर
जगमग अंबर के तारे हैं
बजती ढपली ढोल मँजीरा
स्वारथ का यह ताना बाना

नाच नाच करके फुलझड़ियाँ
गीत दिवाली के ही गाएँ
त्योहारों में मगन सभी हैं
सबका हँसकर मन बहलाएँ
सिसक सिसक रोये मन मैना
मुश्किल है कुछ भी कह पाना

सम्मानित है वे ही केवल
मिट मिट कर जो जी जाते हैं
सफल वहीं हैं सुफल उन्हीं के
अमर वही बस हो जाते हैं
जीवन में सबकी खुशियों हित
हवन देह को बस कर जाना

- डॉ. रंजना गुप्ता

१ अक्टूबर २०२२

       

अंजुमन उपहार काव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम गौरवग्रंथ दोहे रचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है