अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

        किरणों का स्वर्णिम जाला
 
दीपक की किरणों का स्वर्णिम जाला

ज्योतिर्मय है तो जग में उजियारा
दुनिया का सूरज चंदा औ तारा
तिमिर भगाता जगमग
मुखड़े वाला

चुंबन किरणों का प्रकाशमय उज्ज्वल
गाढ़ा मीठा दिल में उतरे पल पल
झीने तारों से जुड़
कर हो माला

रोमांचित कर ज्योति कणों की रैली
लौ बाती की गंध स्वाद में फैली
चटखारे दे हलवा
हो या हाला

जीवन की उर्जा है बहती झर झर
गर्भाशय से आभा देखी छुप कर
लौ दिल में ले निकली
सुंदर बाला

- हरिहर झा
१ नवंबर २०२६

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है