अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

        आस दीप
 
जीवन अमा घनेरी नम आस दीप जलते
मृगतृषा वेदना में मृदु
दिवास्वप्न पलते

नित चाह होम होती नव भोर आस बोती
स्वर्णिम क्षितिज खुलेगा मन कामना सँजोती
तिल-तिल शिखा जली है
मन मोम दीप गलते

लघु वर्तिका सुलगती सित वासना हृदय में
वह झूठ-मूठ बंदिश माँ गा रही सदय में
सोई कली अभी चुप हैं
अक्ष तुहिन ढलते

शुचि यामिनी अमावस धरती-गगन मिलन है
मन बावरा हुआ सा यह बालमन सुमन है
फुलझरी जुगनुओं की
तारे प्रदीप्ति छलते

दे प्यार भरी झप्पी चीवर उढ़ा दिया है
शिशु मुग्ध करे माँ को प्रिय आँख का दिया है
यह नेहलक्ष्मी है
आशीष यहाँ फलते

- सुधा अहलुवालिया
१ नवंबर २०२६

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है