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अभिव्यक्ति  

२०. १२. २०१०

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । नवगीत की पाठशाला

ताल भर सूरज

 

ताल भर सूरज--
बहुत दिन के बाद
देखा
आज हमने
और चुपके से उठा लाए--
जाल भर सूरज!

दृष्टियों में बिम्ब भर आकाश--
छाती से लगाए
घाट
घास
पलाश!

तट पर खड़ी बेला
निर्वसन
चुपचाप
हाथों से झुकाए--
डाल भर सूरज!
ताल भर सूरज...!

ताल भर सूरज--
बहुत दिन के बाद
देखा
आज हमने
और चुपके से उठा लाए--
जाल भर सूरज!

-- शलभ श्रीराम सिंह

इस सप्ताह

गीतों में-

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शलभ श्रीराम सिंह

अंजुमन में-

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गौतम सचदेव

छंदमुक्त में-

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नंद भारद्वाज

छंद में-

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डॉ. हरदीप संधु

पुनर्पाठ में-

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सत्येश भंडारी

पिछले सप्ताह
१३ दिसंबर २०१० के अंक में

गीतों में-
मधु प्रधान

अंजुमन में-
जितेन्द्र जौहर

छंदमुक्त में-
डॉ. टी महादेव राव

छंद में-
यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम'

पुनर्पाठ में-
सत्यनारायण सिंह

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
     
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