अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथ
दोहे पुराने अंकसंकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में डा. भूपेन्द्र कुमार दवे की रचनाएँ—

शिशुगीत-
चिड़िया रानी
नाक
भालू

गीतों में—
तुम चाहो तो

 

  नाक

इधर कान है, उधर कान है
खड़ी बीच में रहती नाक

ऊपर आँखें, नीचे मुख है
बीच पड़ी बस रहती नाक

अच्छा सुनना, मीठा कहना
देख समझकर रखना नाक

बुरा सुने जो, बुरा कहे वो
बुरा दिखे तो कटती नाक

आंख, कान, मुख पहरा देते
इनके कारण बचती नाक

२४ अगस्त २००६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter