अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में राघवेंद्र तिवारी की
रचनाएँ-

कविताओं में-
चिड़िया
चुनाव
पेड़ का जंगल होना
सुबह

 

चिड़िया (दो कविताएँ)

१
बहुत दिन पहले
उड़ी थी एक चिड़िया
पंखों के भीतर
पंखों के बाहर उड़ान
भरने के लिए
तब उसे लगा था
आकाश नाप लेने का सुख
कितना व्यक्तिगत
होता है
और जब वह जुड़ गई
आकाश की चीज़ों से
तब उसे लगा
सार्वजनिक जीवन
कितना होता है
असहाय

२

चिड़िया खो रही है
अपनी पहचान
जबकि उसके पंख हैं
सही सलामत
उसने तय किया है
जब तक आकाश
उसके घोंसले में
नहीं होगा
वह कर देगी उसे घोंसला
मानने से इनकार
और लोगों की ज़िद है
घोंसले और आकाश के फ़र्क को
वे बढ़ाते रहेंगे
निरंतर-निरंतर।

२४ नवंबर २०१४ २२ सितंबर २००८

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter