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  दुआ

ओ पिता!

जब जब जन्म दो मुझे
तो भले ही विस्तार न देना,
या भले ही गहराई न देना,
पर देना अवश्य
चुल्लू भर मीठा पानी

जिसमें कम से कम एक बार
अपनी चोंच डुबोकर
तृप्त हो सके
कोई तो एक नन्ही-सी चिड़िया

और कृतार्थ कर सके
मेरे अस्तित्व को हर बार
तब
जब प्यासी लौटकर आए
विस्तीर्ण और अगाध
समुद्र की यात्रा से हाँफती हुई!!

आमीन!!! एवमस्तु!!!

१ दिसंबर २००८

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