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घोर यह अँधेरा है
ये सब कुदरत की बातें हैं

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आधुनिक गीता

अंजुमन में-
उनमें वादों को निभाने का हुनर होता है
उसका नहीं है हमसे सरोकार दोस्तों
ये कहाँ ज़िंदगी भी ठहरी है

 

क्षितिज

जितनी दूर
दिखाई देता है
वह
सुंदर
मनोरम स्थान,
जहाँ
मिलते हैं
ज़मीन, आसमान
उतनी ही दूर है अभी
गांधी
तेरे सपनों का
रामराज
और
असली आज़ाद हिंदुस्तान।

24 मार्च 2007

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