अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में सतीश सागर की
रचनाएँ -

छंदमुक्त में-
घाव
परिश्रम
समुद्र
सही सोच

 

 

समुद्र

अथाह जल
उतन ही अथाह धैर्य
सच में समुद्र
तुम्हारी रचना
अप्रतिम है
तुम्हारे भीतर छिपा है
अथाह दर्द
और
सबको
समेट लेने की
क्षमता
तुम्हें देखने
निरखने का
अपना
अलग ही
सुख है
ऐसे में तुम
सच में
बेहद करीब
लगते हो
बिल्कुल
तुम्हें
मन से
शत-शत नमन
बारंबार नमन!

१ दिसंबर २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter