अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में शोभनाथ यादव की रचनाएँ

छंदमुक्त में-
तलैया का चिलमन
मरती माँ के लिये
लौटी है रिश्ते लेकर

वैलेंटाइन डे

संकलन में-
गुलमोहर- आरक्त गुलमोहर

 

 

तलैया का चिल्मन

जब रगड़ता है हिरन सींग
पौधे की पतली टहनी से,
तो पीछे लटका चांद
हिलता है दायें-बायें
और तब
बिखर जाती है चांदनी
तलैया की सतह पर
उसके सरसराते
झीने चिल्मन की तरह!
हिरन बढ़ गया आगे,
जाकर छिप गया चांद में
और
यह तिलस्म भी
गायब हो गया
मेरी नजऱों से!

९ अक्तूबर २००९

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter