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अनुभूति में सुशील गुप्ता की
रचनाएँ -

जीवन सूर्यमुखी
झूठ के पक्ष में
मैं हारूँगी नहीं
मेघ शिशु
 

 

 

 

 

जीवन...सूर्यमुखी

अंतस में सहेजे हुए,
अपना किया अनकिया
बहुरंगी अहसासों की संचयिता
टूटे-जुड़े नातों को
अर्पित है कृतज्ञता!

कितना कुछ जाना
कितना कुछ देखा,
फिर भी कितना कुछ छूट गया
अनजाना! अनदेखा!

विपुला इस धरती पर
आशीषों-सा झुका-झुका आसमान-
झरता है शिशिर,
बुलाती-सहलाती नदियाँ
चुनौती देते पहाड़, वन-प्रांतर
लहलहाते खेतों का संवाद,
छेड़छाड़ करतीं चंदनी हवाएँ
बोलती-बतियाती अछोर दिशाएँ
और इन सबसे बढ़कर,
यहाँ से वहाँ तक जुड़े अनंत सरोकार,
हज़ारहा दुःखों में भी बनाते हैं सुखी,
क्योंकि जीवन है सूर्यमुखी।

१९ जनवरी २००९

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