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आहट

आई जब आहट
तुम्हारे आने की
इक झंनकार सी उठी
और उतर गयी
मन के भीतर
और फिर हुआ
कुछ ऐसा कि
ठहरे पानी में
उठने लगीं उर्मियाँ
हवा के झोकों ने की
कीं सरगोशियाँ -
तुम्हें था जिसका इंतज़ार
वही तो
आया है तुम्हारे द्वार

१ फरवरी २०१८

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