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अनुभूति में वेणुगोपाल की रचनाएँ-

कविताओं में-
उड़ते हुए
देखना और सुनना
साथ
ख़तरे
सफ़र
 

  साथ
अंधेरे में हो
इसीलिए
अकेले हो
रोशनी में आओगे
तो
कम से कम
अपने साथ
एक परछाई
तो
जुड़ी पाओगे।

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