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ज़्देन्येक वाग्नेर

जन्म- ३० मई १९५७ को चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में।
शिक्षा- विश्वविद्यालय से रसायनशास्त्र में उपाधि।
साहित्यक
उपलब्धियाँ- ज़्देन्येक वाग्नेर बचपन से चेक भाषा में कविता तथा
कहानियाँ लिखते हैं। उनकी छोटी रचनाएँ तीन आध्यात्मिक पुस्तकों
में प्रकाशित हुई हैं। इसके अतिरिक्त वे विज्ञान साहित्य और बाल
साहित्य और फ़ोटोग्राफ़ी के क्षेत्र में भी वे रुचि रखते हैं।
उन्होंने
कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा में एक कविता लिखी जिसका नाम
कंप्यूटर क्रेडिल सौंग है इसी प्रकार उनकी लिखी वर्चुअल रिअल
स्टोरी भी सॉफ़्टवेयर पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने
बच्चों के लिए परी कथाओं की एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है-
ड्रैगन के सात दिल (चेक भाषा में Sedmero dračích srdcí)। एक
विज्ञान उपन्यास भी प्रकाशित हुआ है जिसका नाम गुणसूत्र ४६,YB
है। वे स्वयं अपनी कविताओं का हिंदी अनुवाद करते हैं। उनके
चित्रों की अब तक उनकी दो प्रदर्शनियाँ हो चुकी हैं। एक
प्रदर्शनी के पहले दिन उन्होंने अपनी कविताओं का पाठ भी किया।
संप्रति चेक
राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत।
संपर्क-
zdenek.wagner@gmail.com
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तीन छोटी कविताएँ
ग्रहण
लाखों तारिकाएँ
विस्मय से देखती हैं
कि सूर्य चाहता है
कि चाँद का ग्रहण हो।
चंद्र एक घंटे में
छाया में सोता है।
अंधेरे से डर बाद
हर जीव को लगता है।
तुमहारे बालों में
समीर नाच रहा है
और प्यार के ग्रहण से
डर मुझे लगता है।
अँधेरा
जब गगन में अँधेरा है
तब मेरा दिल उदास है
जैसे कि मेरी देवी को
रावण अपने द्वीप पर ले।
मुरझाए हुए फूल
जब सब फूल मुरझाए हुए हैं
और बाग़ में ठंडी ही पड़ती है
दीपक का प्रकाश तब ग़ायब है।
कमरे में अंधेरा रहता है।
बाद कुहरा आकाश में बढ़ता है।
वीणा की आवाज़ खो गयी है।
कल मेरे फूल तुम्हें पसंद थे।
आज गुल का काँटा ही बाक़ी है।
२३ नवंबर २००९ |