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अनुभूति में भवेश चंद जायसवाल की रचनाएँ-

गीतों में-
ओ मीत
कागज की नाव
मत दो साथी
मौसम भी लगते हैं
हँसता है कौन

 

हँसता है कौन?

एक गान सिर धुनता
एक गान मौन
हँसने का मौसम यह
हँसता है कौन?

गहरी हैं जड़ें
तनी पत्तियाँ
पनप रहीं निष्ठा, आपत्तियाँ
बँधती उम्मीदें
फिर टूटतीं
शक्ल रहित
अद्भुत अनुभूतियाँ

एक शब्द मुखरित है
एक शब्द मौन

चेहरे से
छुई-मुई मोम
बल, विद्या
बुद्धि, कीर्ति होम
मन मंदिर
डोल गया बेबस
रोमांचित तन के
सब रोम

एक राग रोता है
एक राग मौन

धूल भरी
आँधी का आना
साज़िश है या तानाबाना
मरु हो या
मर्मर मर्यादा
काम किया
किसने मनमाना

एक आग जलती है
एक आग मौन

१५ सितंबर २०१६

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