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अनुभूति में ज्ञानप्रकाश आकुल की रचनाएँ—

गीतों में—
अट्टहासों में तुम्हारी चीख
आज आशंका अचानक
प्रश्न पहला धूप से है
रामभजन परदेस
सुनो तथागत!
हम शापों के अभ्यासी

 

रामभजन परदेस

बच्चों की मोटर लाया था
पीतल के जेवर लाया था
भाई भौजी के कपड़े थे
अम्मा का स्वेटर लाया था
बापू की पूजा की खातिर
कई नर्मदेश्वर लाया था
छोटा भाई माँग रहा है आईफोन नया

बच्चों के अरमान चले हैं
पत्नी के भगवान चले हैं
भौजी के हाथों की मठरी
अम्मा के पकवान चले हैं
चले भेजने बूढ़े बापू
मीलों बिना थकान चले हैं
हाथ दबाकर उसे थमाया रुपया दो रुपया।

तिनका तिनका जोड़ रहा है
कहीं न कुछ भी छोड़ रहा है
हाथों की छेनी से निर्धनता
के पत्थर तोड़ रहा है
सुख की परछाईं के पीछे
आँखें मीचे दौड़ रहा है
खर पतवार चोंच में दाबे उड़ता रहा बया।

१ दिसंबर २०१७

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