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अनुभूति में आदिश जैन की कविताएँ

फूल
प्यार भरा जहाँ
यादों का धुआँ

 

फूल

फूल जब तक होता है किसी डाली पर,
उस डाली को सजाता है।
जो भी देखता है उसे, उसके दिल में
एक अजीब-सा सुकूँ लाता है।।
जो भी आता है इसके पास,
उसे अपनी खुशबू से महकाता है।
जब तोड़ लेता है कोई,
किसी और की सुंदरता बन जाता है।।
जब लबों से न कह पाए को,
तो उसके प्यार का इज़हार बन जाता है।
जब मुरझा जाता है, किताबों में किसी के
प्यार की निशानी बन जाता है।।
काश हम इस बेजुबाँ से, इस मासूम से ही
कुछ सीख पाते।
मरने के बाद तो न सही,
जीते जी किसी का जीवन महका पाते।।

9 मार्च 2007

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