अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में भूपेंद्र सिंह कटाक्ष की रचनाएँ

कविताओं में-
क्रम
जागृति
परिचय

 

परिचय

तुम्हें अवलोकित किया
तो

तार उर-वीणा के झनझना उठे,
द्विरेफ रसाप्लावित हो मधुर गीत गा उठे;
औ' मेरे-तुम्हारे हृदय का,
आत्मानंद के साथ तादात्म्य स्थापित हो गया।

तुम हँस उठीं,
फिर विहँस उठीं;
औ' लजाते हुए, पलकें झुकाते हुए,
तुम्हारा चिराकुल स्नेह ज्ञापित हो गया।।

तुम्हारी महक से भाव नवीन हो गए,
प्रेमाचार में हम अब प्रवीण हो गए;
औ' शलभ लौं पल-विपल,
वह्नि में प्रज्ज्वलित होकर सर्वस्व समर्पित कर दिया।

द्विरेफ-पुष्प ईर्ष्या कर रहे,
हृदय हमारे डर रहे,
औ' इसी डर के साथ, सौंप स्वयं को प्रीति के हाथ,
उन्मत्तता में तन-मन आलिंगित कर दिया।।

अनुराग सबल-सशक्त हुआ,
हृदय अधिक अनुरक्त हुआ;
औ' प्रणय डोर में आबद्ध कर तुमने,
जीवन प्रेमानंद से पूर्ण कर दिया।

तुम्हारे प्रेम ने यौवन दर्शाया,
मेरी आसक्ति ने उन्माद दिखाया;
औ' मेरा हृदय हर; मकरंद प्रसारित कर
तुमने गृह में आह्लाद भर दिया।।

२१ अप्रैल २००८

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter