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खामोशी

खामोशी
एक अपरिभाषित शब्द
कभी यह पीड़ा को
व्यक्त करती है
तो कभी हिंसा का
पर्याय बनती है
ठीक वैसे ही
जैसे तूफ़ान के पूर्व की खामोशी
कभी-कभी जब अभिव्यक्ति के लिए
भाब्द नहीं मिलते
तो भी खामोश
हो जाते हैं लोग
गूँगा खामोश होता है
भक्त खामोश होता है
हिंसा खामोश होती है
और प्यार भी खामोश होता है
लेकिन हर खामोशी के
अपने अलग अंदाज़ हैं।

२१ अप्रैल २००८

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