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अनुभूति में राजीव कुमार की कविताएँ

कविताओं में-
आज लगा
भूमंडल पर
स्नेह की देवी

 

स्नेह की देवी

देवी है स्नेह की तू स्पर्श में तेरी मादकता
प्रेम शब्द के उच्चारण की पूरी है तू परिभाषा

फूलों सा मुस्काता चेहरा
निर्झर झरने सा है गाता
सूरज की फूटी किरणों सा
परिधान सुनहरा है भाता

प्रकृति के गुण मूल किए
जब निकले है कंचन काया
नदिया की छ्ब फबने लगे
सीधा रस्ता भी बलखाता

अंधी काली वो निशा घटे
जब पलकें उसकी खुल जाएं
सूरज ये उगे जीवन ये चले
देवों का ह्रदय भी हर्षाता

वृक्षों की ऊँची चोटी तक
बेल जो योंही चढ़ जाए
उसकी मीठी बोली सुन
जंगल सारा तब महकाता

जीवन में भरता है रस
भरता है सुखों का हर प्याला
उस दूब का फिर तो भाग्य खुले
जो उसके पैरों में कुचलाता

नित नए विचारों से सज्जित
परी है वो तो आधुनिक
शब्दों का खुद ही सृजन करे
जो भी बोले वो मन भाता

पक्षी तब कलरव करते हैं
नदियों में ध्वनि तब होती है
जिह्वा से निकले सरगम जब
सारा जग उसके संग गाता

देवी है स्नेह की तू स्पर्श में तेरी मादकता
प्रेम शब्द के उच्चारण की पूरी है तू परिभाषा

24 नवंबर 2007

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