अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में रुचि राजपुरोहित तितिक्षा
की रचनाएँ

नन्ही परी
रंग चटकीला
संघर्ष
 

 

रंग चटकीला

बिखरा-बिखरा रंग चटकीला
बीच में तीतर अलबेला
दिखे ऊपर तीखी चोटी
जिस पर झंडी छोटी,
चौका एक गिरता पानी
जैसे निकली गंगा रानी
आज सुबह जब
उठकर देखा
भोली सूरत प्रभाकर पीला
तब आया एक पुजारी
पहनकर झोला,
बजाया शंख, छिड़का कुमकुम
ढोल बजा और पानी छमछम!!
ढूँढ रहा है बेजान में जान
न इससे कोई अनजान,
हाथ में धड़कन होगी
और इंसान में भगवान

७ जुलाई २००८

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter