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अनुभूति में विकास चंचल की रचनाएँ

कविताओं में-
कल्लो अम्मा
झूठ या हकीकत
तीन क्षणिकाएँ
सज़ा
हँसी

  हँसी

किसी पेड़ की किसी गुमनाम शाख की
कोई पत्ती...
पूछती होगी
दूसरी पत्ती से...
इस इंसानों की कौम को
आखिर बीमारी क्या है
ऐसा क्या है
जिसके पीछे ये भागता फिरता है...
ऐसा क्या है
जो ये पा लेता है...
सुनके उनकी बातें
पास से गुज़रता एक इंसान खूब हसा...
और उनकी हँसी देखकर...
वो पत्तियाँ भी खूब हँसी...

४ अगस्त २००८

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