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गुलमोहर खिल गए

 

चूम कर
सूर्य के सुरमई भाल को
गंध की घाटियों के 
शिखर हिल गए
भाव के ज्वार ऐसे निरंकुश हुए
द्वार पर अनगिनत गुलमोहर
खिल गए

गुलमोहर
भाव है मन का आयाम है
गुलमोहर तेज का
दूसरा नाम है
ग्रीष्म के ताप को अंक में भर धरा
कसमसाई लजाई अधर
मिल गए

- डॉ . जगदीश व्योम
१६ जून २००६ 

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