अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मेरा भारत
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन

 

तीन छोटी कविताएँ

स्वाधीनता दिवस

इंतज़ार है
पन्द्रह अगस्त का
जब लगेगी प्रभात फेरी बच्चों की।
हम घबरा कर
उस दिन निकलेंगे
बिस्तर से सबेरे सबेरे।
बच्चों का जूनून देख
दिल हुलस उठेगा।
जल्दी जल्दी नहा धो कर
बैठना होगा
दूरदर्शन के सामने।
तिरंगा फहराना होगा घर की छत पर।

इंदुबाला सिंह

हर चुनौती के लिए ...!

इस भवन की नींव के
पत्थर है हम,
अमिट स्याही से लिखे
अक्षर हैं हम,
हम समर्पित सजग प्रहरी
राष्ट्र के,
हर चुनौती के लिए
तत्पर हैं हम !

--विश्वम्भर शुक्ल

अनंत जीवन

वे देशभक्त
आज़ादी हित
फाँसी के तख्ते पर झूले

हँसते हँसते
कह गए
वचन ये मौन-
'निज देश हेतु
मरना न मृत्यु
जीवन अनंत है'

-- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

१३ अगस्त २०१२


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter