अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मेरा भारत 
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन 

 

क्या खौफ दरिंदों से

१
क्या खौफ़ दरिंदों से
हमको तो डर है
घर के जयचंदों से

२
क्या फूल यहाँ महकें
ज़हर हवाओं में
पंछी कैसे चहकें

३
ये रात बहुत काली
है कितना गाफिल
इस बगिया का माली।

४
है चाह सवेरे की
खींचो तो मिल के
ये पाल अँधेरे की

५
रुख मोड़ लिया हमने
कल की बातों को
कल छोड़ दिया हमने ।

६
धोखा हर बार करे
वैरी है कायर
छुप-छुप कर वार करे

७
कैसी ये लाचारी
जब इक वीर यहाँ
है, सौ-सौ पर भारी

८
भूले बलिदानों को
वीर शहीदों के
समझो अरमानों को

९
इक राह दिखाई थी
खूँ देकर अपना
बगिया सरसाई थी

१०
यूँ पर्व मनाते हो
दीप जलाने की
बस रस्म निभाते हो

ज्योत्सना शर्मा
१२ अगस्त २०१३


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter