अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मेरा भारत 
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन 

 

उम्मीदें थीं

उम्मीदें थीं
आजादी खुशहाली लायेगी।

रखा सूद पर
जुआ और हल तक बैलों का
बस खुदकुशियाँ ही हल हैं ठण्डे चूल्हों का
तय तो था खलिहानों की
बदहाली जायेगी।

नींव टिकी
सरकारों की दंगों, बलवों पर
लोकतंत्र है पूँजीपतियों के तलवों पर
सोचा तो था सोच गुलामों
वाली जायेगी।

स्वार्थ–बुझे
पासे फिंकते कब से चौसर पर
नग्न–क्षुधित जनतंत्र हारता हर अवसर पर
राजभवन से कब यह नीति–
कुचाली जायेगी।

हल्की
ममता हुई सियासत के हलके में
सरहद से माँ को मिलते हैं धड़ तोहफ़े में
इल्म न था इस तरह लहू की
लाली जायेगी।

–कृष्ण नन्दन मौर्य
१२ अगस्त २०१३


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter