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मेरा भारत 
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन 

 

तब आई तिथि पंद्रह अगस्त

तब आई तिथि पंद्रह अगस्त

पहले से ही था क्षोभ ग्रस्त
अत्याचारों से हुआ त्रस्त
जब आम आदमी हुआ व्यस्त
तब आई तिथि पन्द्रह अगस्त

बलिदानी थे, थे वरद हस्त
विख्यात हुए, कुछ रहे अस्त
जब चले साथ मिल, सर परस्त
तब आई तिथि पन्द्रह अगस्त

जब हुआ क्रान्ति का पथ प्रशस्त
मतभेद हुए सारे निरस्त
घातक मनसूबे हुए ध्वस्त
तब आई तिथि पन्द्रह अगस्त

जुड़ गये वीर बाँके समस्त
घर घर से होने लगी गश्त
चुन चुन मारे फिरका परस्त
तब आई तिथि पन्द्रह अगस्त

सब चेहरे दिखने लगे मस्त
परचम लहराने लगे हस्त
जब अंग्रेजों को दी शिकस्त
तब आई तिथि पन्द्रह अगस्त

है प्रगतिशील हर एक दस्त
है हिन्द विश्व से फिर बवस्त
है नीति हमारी सुविश्वस्त
बस याद रहे पन्द्रह अगस्त

नवीन चतुर्वेदी
१२ अगस्त २०१३


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