अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मेरा भारत 
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन 

 
 
वही तो देश मेरा है
 

हवा में गंध है जिसकी
मधुर मकरंद है जिसकी
जो साँसों में बसे हरदम
वही तो देश मेरा है

जहाँ पर बाँस के वन में हवा सीटी बजाती है
जहाँ फागुन के आने पर कुहू कोयल उठाती है
स्वरों में सार है जिसके
दिलों में प्यार है जिसके
जो सपना सा सजे हरदम
वही तो देश मेरा है

जहाँ पर भोर तुलसी पर सुबह रोली चढ़ाती है
जहाँ पर चाँदनी पीपल से मिलकर झिलमिलाती है
जो रंगों में निखरता है
जो खुशबू सा बिखरता है
रंगोली-सा रचे हरदम
वही तो देश मेरा है

जहाँ पर लोग खुशियों को गले मिलकर मनाते हैं
जहाँ बच्चे बड़ों के पाँव छू आशीष पाते हैं
नेह के गीत जो गाए
सभी के काम जो आए
जो अपना-सा लगे हरदम
वही तो देश मेरा है

- पूर्णिमा वर्मन


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter