अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मेरा भारत
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन

माटी चंदन है

प्रात: स्मरणीय शहीदों का वंदन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

जिन्हें आत्म सम्मान रहा प्राणों से प्यारा
उन्हें याद करती अब भी गंगा की धारा
ले हाथों में शीश चले ऐसे मतवाले
आज़ादी के लिए हालाहल पीने वाले
आज़ादी के रखवालों को हृदय नमन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

जिनकी दृढ़ता से उन्नत है आज हिमालय
अब उनके पद चिन्ह हमारे लिए शिवालय
आज तिरंगा जिनकी याद लिए फहराता
वक्त आज भी जिनकी गौरव गाथा गाता
धन्य नींव के पत्थर जिनपर बना भवन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

महके बीस गुलाब गंध बाँटे खुशहाली
नव दुल्हन-सी खेतों में नाचें हरियाली
अनुशासन से देश नया जीवन पाता
कर्मशील ही आगे जा पूजा जाता है
आज धरा खुशहाल और उन्मुक्त गगन है
जिनके त्याग तपोवन से माटी चंदन है

- सजीवन मयंक

16 अगस्त 2006

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter