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दीप धरो
वर्ष २०१० का दीपावली संकलन

दीपावाली हाइकु

१
मनी दीवाली
बाग-बगीचों में भी
जुगनू संग ।

२
उठती नहीं
लौ अब चिरागों से
सूखे हैं दिए ।

३
अँधियारे की
उजियारे के आगे
टूटती साँसे ।

४
रखती रही
अँधेरी अटारों पे
रोशनी मोती ।

५
रूठा अँधेरा
लड़ा चाँदनी संग
छोड़ा है साथ ।

६
दौड़ता रहा
रात भर अँधेरा
देख चाँदनी

७
फैला प्रकाश
इन्द्रधनुष जैसे
देखो ना कैसे ।

८
चाँद बेचारा
देख दीपशिखायें
मुँह छुपाये ।

९
दीप कतारें
चमकीले सितारे
अँधेरा हारे ।

१०
दीये सजाओ
दूर करो सारा ही
ये अँधियारा ।

११
मिटा न सका
गम का अँधियारा
नन्हा दीपक ।

१२
चारों तरफ
फैला है अँधियारा
टूटे हैं दीए।


--
भावना कुंअर
१ नवंबर २०१०

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