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दीप धरो
वर्ष २०१० का दीपावली संकलन

दीवाली में दीप जले

दीवाली में दीप जले
सभी यार मिल रहे गले
एक नया अंबर हो जैसे
तारों के अंबर के तले

आज अयोध्या बजी बधाई
गाँव नगर में खुशियाँ लाई
झूम रहे हैं बच्चे बूढे
नाचें गावें लोग लुगाई

सजधज कर बच्चे तैयार
मम्मी पापा चलो बाजार
खूब पटाखे हमें दिलाओ
दीवाली का है त्योहार

गाँव गली में हुई सफाई
बाजारों में रौनक छाई
कहीं जलेबी तलती देखो
कहीं सजी है रसमलाई

सभी पड़ौसी रिश्तेदार
बाँट रहे आपस में प्यार
इक दूजे के घर तक जाएँ
बना रहे सबका व्यवहार

साल बिताकर आने वाली
ढेरों खुशियाँ लाने वाली
सारे जग के तम को हर ले
ऐसा है त्योहार दिवाली

-- प्रवेश कुमार सिंह बिष्ट
१ नवंबर २०१०

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