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दीप धरो
वर्ष २०११ का दीपावली संकलन

जगमग जोत जले



 

मन हो रहा प्रफुल्लित
घर में
जगमग जोत जले

आनंदित किलकारी भरती
नव संचित फुलझड़ियों सी
श्याम रात
चम चम करती है
उत्सव वाली लड़ियों सी
स्वप्न सजीले संचित
सुख समृद्धि की ओर चले

सुन्दर शाश्वत हो शृंगार
पूजा की फिर थाल संवार
राम राम नाम
की धुन को रटते
सारी विपदाएँ हों पार
लक्ष्मी चरण हों अंकित
जग से भय ओर क्रोध टले !

-नूतन व्यास

२४ अक्तूबर २०११

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