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शुभ दीपावली

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दीप तुल्य उजियार

शुभता साहस शीलता रखिए शुद्ध विचार।
भजन कीजिए पाइए दीप तुल्य उजियार।।
दीप तुल्य उजियार रमा की अस्तुति कीजे
पाइय परम प्रसादमोद मन में भर लीजे
वरदायिनि माँ से वर पाएँ तजि लोलुपता
लीजे परमानंद 'विकल' मत तजिये शुभता।।

-जगदीश प्रसाद सारस्वत 'विकल तैयब'
16 अक्तूबर 2006

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।