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शुभ दीपावली

अनुभूति पर दीपावली कविताओं की तीसरा संग्रह
पहला संग्रह
ज्योति पर्व
दूसरा संग्रह दिए जलाओ

परी है रोशनी

गगन से उतरी परी है रोशनी
आस्था पाकर हरी है रोशनी

रूप जिसका कल्पनाओं से परे
ह्रदय की कादंबरी है रोशनी

खोज पाओ तो स्वयं में खोज लो
प्यार की बारादरी है रोशनी

दीप त्यागी है तपस्वी है
मगर उसकी सहचरी है रोशनी

धरा से आकाश को जो जोड़ती
सात रंगों की ज़री है रोशनी

तम दिशा भ्रम ही सदा देता रहा
रास्तों की फुलझरी है रोशनी

खिड़कियों से मुँह चिढ़ाती है हमें
एक अल्हड़ छोकरी है रोशनी

-सजीवन मयंक
1 नवंबर 2007

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।