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शुभ दीपावली

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मंगलमय दीपावली
(मुक्तक)

1
शक्तिमान हो न्याय सत्य की सदा विजय हो
भ्रष्टाचारी गहन अँधेरा क्रमश: क्षय हो।
राष्ट्रभक्ति की ज्योति प्रकाशित हो हर दिल में
पावन दीपावली सभी को मंगलमय हो।।


2
जलाकर दीपक अँधेरा छाँट देंगे
सभी मिलजुल कर उजाला बाँट लेंगे।
चार दिन की चाँदनी के ही सहारे
अँधेरी रातें सभी फिर काट लेंगे।।


3
उजियारे का अँधियारे से नाता गहरा होता है
इसीलिए तो अँधकार के बाद सबेरा होता है।
हो प्रकाश से प्रेम किंतु तम से भी घृणा न करना
कहते हैं सब दिया तले ही सदा अँधेरा होता है।।

-शास्त्री नित्यगोपाल कटारे
16 अक्तूबर 2006

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।