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शुभ दीपावली

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कितने दीप जलाऊँ द्वारे

कितने दीप जलाऊँ द्वारे,
प्रियतम तेरे स्वागत में।

रोज़ गिरें नयनों से मोती।
बुझी हुई जो मन की ज्योति।
आओ उसे जलाएँ मिलकर,
हम तुम दोनों आपस में।
कितने दीप जलाऊँ द्वारे,
प्रियतम तेरे स्वागत में।।

महक उठा जूड़े का गजरा।
बहा तेरे स्वागत में कजरा।
शीतल किरणें लेकर आया,
कोई चाँद अमावस में।
कितने दीप जलाऊँ द्वारे,
प्रियतम तेरे स्वागत में।।

दिल में छूट रहीं फुलझरियाँ।
खनक उठीं हाथों की चूड़ियाँ।
झुकी नयन की पलकें मेरी,
पुनि-पुनि तेरे स्वागत में।
कितने दीप जलाऊँ द्वारे,
प्रियतम तेरे स्वागत में।।

-संतोष कुमार सिंह
16 अक्तूबर 2006

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