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अभिव्यक्ति  

३१. ८. २००९

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । नवगीत की पाठशाला

रेशमी कंगूरों पर नर्म धूप

  रेशमी कंगूरों पर
नर्म धूप सोयी।
मौसम ने
नस-नस में
नागफनी बोयी!
दोषों के खाते में कैसे लिख डालें
गर अंगारे याचक बन पाँखुरियाँ
माँग गए

कच्चे रंगों से
तसवीर बना डाली,
हल्की बौछार पड़ी
रंग हुए खाली।
कितनी है दूरी, पर, जाने क्या मजबूरी
कि
टीस के सफ़र की कई सीढ़ियाँ,
फलाँग गए।

खंड-खंड अपनापन
टुकड़ों में
जीना।
फटे हुए कुर्ते-सा
रोज़-रोज़ सीना।
संबंधों के सूनेपन की अरगनियों में
जगह-जगह
अपना ही बौनापन
टाँग गए!

- कन्हैयालाल नंदन

इस सप्ताह

इस माह के कवि-

अंजुमन में-

छंद मुक्त में-

दिशांतर में-

क्षणिकाओं में-

पिछले सप्ताह
२४ अगस्त २००९ के अंक में

गीतों में-
रमेश पंत

अंजुमन में-
अनिरुद्ध सिन्हा

दिशांतर में-
सुरेश ऋतुपर्ण

पुनर्पाठ में-
डॉ. जितेन्द्र वशिष्ठ

दोहों में-
अशोक अंजुम

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
 
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