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अभिव्यक्ति  

२७. ९. २०१०

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । नवगीत की पाठशाला

अनगढ़ मन

 

अनगढ़ मन सपनों की दुनिया
रोज सजाता है
ढोल मंजीरे झांझ पखावज
साज बजाता है

मिलता जब कोई प्यारा सा
अंधियारे में उजियारा सा
उस प्यारे संग पंख पसारे
असमान में हो भिनसारे
उड़ता जाता है

उलझा संबंधों का धागा
रिश्तों पर बैठा हो कागा
संवादों की डोर थामकर
ताना बाना खींच तानकर
सब सुलझाता है

कभी चपल चपला सा चहके
कभी अलस की साँझ में दहके
बह जाता जीवन धारा में
जैसे नाव नदी में मांझी
खेता जाता है

-राणाप्रताप सिंह

इस सप्ताह

गीतों में-

अंजुमन में-

छंदमुक्त में-

हाइकु में-

गाँधी जयंती के अवसर पर संकलन-

पिछले सप्ताह
२० सितंबर २०१० के अंक में

गीतों में-
आचार्य संजीव सलिल

अंजुमन में-
संजय ग्रोवर

छंदमुक्त में-
रामेश्वर कांबोज हिमांशु

दोहों में-
सरदार कल्याण सिंह

पुनर्पाठ में-
संगीता गोयल

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
   
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