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संजय ग्रोवर

जन्म: 5 अप्रैल 1963

शिक्षा: बी.कॉम.

कार्यक्षेत्र: लिखना-पढ़ना, संगीत, कार्टून बनाना और फैशन डिज़ायनिंग जैसी रुचियाँ संजय ग्रोवर को रचनाशील व्यक्तित्व प्रदान करती हैं। लिखना उन्होंने लगभग 15-16  वर्ष की आयु से प्रारंभ किया। तब से अबतक स्कूल कॉलेज और फिर पत्र-पत्रिकाओं व फ़ीचर एजेंसियों में विभिन्न विषयों पर अनेक व्यंग्य, लेख, ग़ज़लें, कविताएँ बालगीत व कार्टून प्रकाशित हो चुके हैं।

उनका एक ग़ज़ल संग्रह 'खुदाओं के शहर में आदमी' तथा एक व्यंग्य संग्रह 'मरा हुआ लेखक सवा लाख का' नाम से प्रकाशित हुआ है।

संप्रति: पी.सी.ओ. संचालन व स्वतंत्र लेखन

ई मेल: samvadoffbeat@yahoo.co.in

 

अनुभूति में संजय ग्रोवर की रचनाएँ

नई ग़ज़लें
इनको बुरा लगा
दर्द को इतना जिया
दासी बना के मारा
रोज़ का उसका

महिला दिवस पर विशेष
स्त्री थी कि हँस रही थी
हमारी किताबों में हमारी औरतें

अंजुमन में
असलियत के साथ
आज मुझे
आ जाएँगे
किस्सा नहीं हू
कोई बात हुई
ग़ज़लों में रंग
जो गया
डर में था
तितलियाँ
तुम देखना
तौबा तौबा
बह गया मैं
बाबा
मौत की वीरानियों में
मंज़िलों की खोज में
लड़केवाले लड़कीवाले
लोग कैसे ज़मीं पे
सच कहता हूँ
सोचना
हो गए सब कायदे

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।