अनुभूति-कालजयी कविताओं का कांत कलेवर
         

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अभिव्यक्ति तुक-कोश

१. ८. २०१६

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पालों वाली नाव बनाएँ

 

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पालों वाली नाव बनाएँ
केवट उनमें करता छेद

तन-मन चीरा, टाँका, बाँधा
अपनी लकड़ी साधा, राँधा
हठ करते, आघात सहे सब
छाती पर धारा ले नाँधा

चप्पू-चप्पू रार करे हैं
कैसा पतवारों में भेद

काता, बीना, रंगा, साजा
मखमल तन बहुरंगा छाजा
रेशम धागे गेंदे फूले
चीर, शिखर से नाचे, झूले

तान धरा सिर, हवा पलट दें
पालों में उपजा विच्छेद

आर, पार नदिया तन-नापा
जल में आग, भूख का तापा
जीवन अड़ा पड़ा जल भीतर
तट देखे तन चढ़ा बुढ़ापा

मोटर बाँध, नेह से दौड़ी
नाविक तीर न चलता, खेद
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- शीला पांडेय

इस पखवारे

गीतों में-

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शीला पांडे

अंजुमन में-

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पंकज कुमार मिश्र वात्स्यायन

छंदमुक्त में-

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सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस

दोहों में-

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इंद्र कुमार दीक्षित

पुनर्पाठ में-

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अमरनाथ श्रीवास्तव

पिछले पखवारे
१५ जुलाई २०१६ को प्रकाशित अंक में

गीतों में-
मनोज जैन मधुर

अंजुमन में-
सोनरूपा विशाल

छंदमुक्त में-
परिचय दास

दोहों में-
क्षिप्रा शिल्पी

पुनर्पाठ में-
आचार्य सारथी

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संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

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