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अनुभूति में हसन सिवानी  की रचनाएँ-

आजकल
इन दिनों
मैं तुझे चाहूँगा
यादों का साया
शम्मे वफ़ा जलाएगा
 

 

मैं तुझे चाहूँगा

मैं तुझे चाहूँगा ऐ मुझको भुलाने वाले।
लिख के काग़ज़ पे मेरा नाम मिटाने वाले।

देख कुदरत का करिश्मा ये निराला है बहुत,
आग बुझ जाएगी ऐ आग लगाने वाले।

तू भी हो जाएगा बदनाम हलाकू की तरह,
एटमी बम किसी बस्ती दे गिराने वाले।

एक दिन तेरा भी अंजाम बुरा होगा बहुत,
किसी लाचार और बेबस को सताने वाले।

बद्दुआ देगा तुझे खून का इक-इक कतरा,
उड़ते पंछी पे निशाने को लगाने वाले।

माफ़ तुझको न करेगी कभी तारीखे वफ़ा,
देश के नाम पे ऐ धब्बा लगाने वाले।

जाँ निसारी तो बड़ी चीज़ है दुनिया में हसन,
मात खाते ही रहे प्यार जताने वाले।

२ फरवरी २००९

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