अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में मुसव्विर रहमान की रचनाएँ-

अंजुमन में-
इक अधूरी सी मुलाकात
कैसा अंधेर है
कौन सा लम्हा था
चमक रही हैं आँखें
जो हर इक बात पर

 

इक अधूरी सी मुलाकात

इक अधूरी सी मुलाक़ात ने सोने न दिया
रात भर उनके ख़्यालात ने सोने न दिया

बर्क चमकी तो मुझे याद तुम्हारी आई
और उस याद की सौग़ात ने सोने न दिया

रोशनी क्या है? हंसी क्या है? मसर्रत क्या है?
उसको घर भर के सवालात ने सोने न दिया

नींद ने लोरियाँ दे दे के सुलाना चाहा
क्या करूँ गर्दिशे हालात ने सोने न दिया

ज़र्द चेहरा है परेशान हैं ज़ुल्फें उसकी
उसको भी इश्क़ के सदमात ने सोने न दिया

ऐ ‘मुसव्विर' थी हर इक बूँद में आहट उसकी
गीत गाती हुई बरसात ने सोने न दिया

१३ जनवरी २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter