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अनुभूति में श्यामसखा श्याम की रचनाएँ-
नई ग़ज़लें-
उसको अगर परखा नहीं होता
क्या करता
जब मैं छोटा बच्चा था
गूँगे का बयान
दर्द तो जीने नहीं देता मुझे
दिल नहीं करता
हम जैसे यारों से यारी
तेरे शहर में
वो तो जब भी ख़त लिखता है

अंजुमन में-
आस इक भी
खुद से जुदाई
हैं अभी आए

 

जब मैं छोटा बच्चा था

जब मैं छोटा बच्चा था
सपनों का गुलदस्ता था

आज नुमाइश भर हूँ मैं
पहले जाने क्या-क्या था

अब तो यह भी याद नहीं
कोई कितना अपना था

आज खड़े हैं महल जहाँ
कल जंगल का रस्ता था

नाजुक कन्धो पर लटका
भारी भरकम बस्ता था

वो पगंडड़ी गई कहाँ
जिस पर आदम चलता था

तुझको पाने की खातिर
उफ़ दर-दर मैं भटका था
दर-दर मैं तो भटका था

२३ जून २००८

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है