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तुम तीनों
किधर जा रहे हो भाई?

उधर पतझड़ है
रेत की चमक है
अँधेरा है

तुम तीनों
किधर जा रहे हो भाई

एक तुम
जो सिफर्र बोल लेते हो
और बोलते–बोलते
सब सोख लेते हो

और तुम, जो देख लेते हो
और बस सोच लेते हो

और एक तुम
जो निचोड़कर डाल दिए जाते हो
कंॅटीले तारों पर सूखने को
जो सब सह लेते हो
किसी तरह बह लेते हो

तुममें से
मुँह से
सोच से
हाथ से
पूरा आदमी कौन है
पूरा आदमी बनेगा
सोच को हाथ
हाथ को सोच का साथ देने में
सोच और हाथ को
अपनी आव़ाज देने में
पूरा आदमी बनेगा!
तुम तीनों
किधर जा रहे हो भाई?

२३ अप्रैल २०१२

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