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अनुभूति में धर्मेन्द्र कुमार सिंह 'सज्जन' की रचनाएँ-

नयी रचनाओं में-
काश यादों को करीने से
चंदा तारे बन रजनी में
छाँव से सटकर खड़ी है धूप
जो भी मिट गए तेरी आन पर
दे दी अपनी जान

अंजुमन में-
अच्छे बच्चे
गरीबों के लहू से
चिड़िया की जाँ
निजी पाप की
मिल नगर से

छंदमुक्त में-
अम्ल, क्षार और गीत
दर्द क्या है
मेंढक
यादें
हम तुम

 

अम्ल, क्षार और गीत

अम्ल, क्षार और गीत
मेरे कुछ मनमीत,
अम्ल, क्षार और गीत।

एक खट्टा है,
दूसरा कसैला है,
तीसरे के सारे स्वाद हैं।

पहला गला देता है,
दूसरा जला देता है,
तीसरा सारे काम कर देता है।

पहले दोनों को मिलाने पर,
बनते हैं लवण और पानी,
अर्थात खारा पानी,
अर्थात आँसू,
और तीनों को मिलाने पर,
बन जाता हूँ मैं।

२७ जून २०११

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