अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में मनोरंजन तिवारी की
रचनाएँ-

नयी रचनाओं में-
अनगढ़ कविता
ऐसा क्यों होता है
कविता सी कुछ
खो गई है मेरी कविताएँ कहीं
मेरी कविता
मैं कवि नहीं हूँ

छंदमुक्त में-
अंकुर
दिल पर ले यार
प्रकृति
माँ भी झूठ बोलती है
लड़कियाँ

 

खो गई है मेरी कविताएँ कहीं

ढूँढ रहा हूँ अपनी कविताओं को
भाड़े के कमरे के
कोने-कोने में
जहाँ कमरे के बाहर खोले गए
चप्पलों की संख्या के हिसाब से
बढ़ जाता है किराया
हर माह

ढूँढ रहा हूँ अपनी कविताओं को
चावल, दाल और आटे के
खाली कनस्तरों में
बेटी के दूध की बोतल में
जिसमें तीन चौथाई
पानी मिला है

ढूँढ रहा हूँ अपनी कविताओं को
पत्नी की बेबस आँखों में
माँ की कराहों में
"अपने साहब " की गुर्राहटों में
परिजनों के रहमहिल
उद्गारों में

ढूँढ रहा हूँ अपनी कविताओं को
कुछ भूले-बिसरे दोस्तों के साथ
गुजारे उन खुबसूरत पलों में
जो गलती से भी मय्सर
नहीं होते अब एक
पल के लिए भी।

अभी -अभी तो दिखी थीं कविताएँ
जब सोच रहा था उसकी बातें
जो कभी मेरी हर ख़ुशी की
वजह हुआ करती थीं
उसकी निश्छल मुस्कुराहटों में
गुम हो जाते थे हर गम
और दुःख की छाया भी
पर बदले हालात में बदली उसकी
मुस्कुराहटों में
गुम हो गईं मेरी कविताएँ फिर से
ढूढ़ रहा हूँ अपनी कविताएँ।

१५ जनवरी २०१६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter