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नृत्यानुभव-३ :नयी रचना के लिए

` नृत्यानुभव-३ : नयी रचना के लिए

तीव्र प्रकाश की एक कौंध
लय-ताल में
जगमगा-उठते, बजने लगते घुँघरू
फैलती संगीतात्मक ध्वनियाँ

स्तर-स्तर उठता जाता
तल्लीनता में डूबा नर्तन
लय-ताल का आवर्तनकारी नृत्य
कोई नहीं अपना जहाँ

प्रकाश-गति और रंग-भाषा
हर अंग में
हिलोरें लेतीं समुद्र की उत्ताल तरंगे

क्या है यह उद्वेलन
कैसा यह साक्षात्कार कि टूटती सीमाएँ
नयी रचना के लिए!

९ सितंबर २००६

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