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छोटी कविताएँ-
सिर्फ एक विचार, पाळसिया, आह ठंडी राह, चाँद

छंदमुक्त में-
अक्स को अपने
तुम हो तो
तुम्हारी उदासी
क्षितिज के उस पार

एक क्षणिका

 

अक्स को अपने

सर्द रातों में
चाँदनी
बर्फ बन ढली है
या
पिघल कर
चाँद उतर आया है
झील में !

अकेला हंस
तकता है-
अक्स को अपने

२१ फरवरी २०११

 

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